चेक बाउंस हुआ तो हो सकती है जेल – जानें सुप्रीम कोर्ट का नया नियम | Cheque Bounce Law

By Neha Negi

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Cheque Bounce Law : चेक बाउंस तब होता है जब कोई व्यक्ति भुगतान के लिए चेक देता है लेकिन उसके बैंक खाते में उतनी राशि मौजूद नहीं होती। ऐसी स्थिति में बैंक उस चेक को स्वीकार नहीं करता और उसे “बाउंस” कर देता है। इसके अलावा कई बार गलत सिग्नेचर, अकाउंट बंद होना, या तकनीकी गलती भी चेक बाउंस की वजह बन सकती है। जब चेक बाउंस होता है तो बैंक एक मेमो जारी करता है जिसमें कारण लिखा होता है कि चेक क्यों स्वीकार नहीं किया गया। भारत में हर साल लाखों चेक बाउंस के मामले सामने आते हैं और कई बार इससे लोगों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है। इसलिए चेक के जरिए लेन-देन करते समय हमेशा सावधानी बरतना जरूरी होता है।

सुप्रीम कोर्ट का नया नियम 6 अप्रैल 2026 से क्या बदला?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए और निचली अदालतों को इनकी सुनवाई तेजी से पूरी करनी होगी। माना जा रहा है कि 6 अप्रैल 2026 से इन मामलों में ज्यादा सख्ती देखने को मिल सकती है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर चेक बाउंस करवाता है और बाद में कोर्ट की तारीखों पर बार-बार अनुपस्थित रहता है, तो अदालत उसकी जमानत रद्द कर सकती है और जेल भेजने का आदेश भी दे सकती है। इस कदम का मकसद यह है कि लोग चेक बाउंस जैसे मामलों को हल्के में लें और समय पर अपने भुगतान की जिम्मेदारी निभाएं।

चेक बाउंस होने पर कानूनी प्रक्रिया क्या होती है?

अगर किसी का चेक बाउंस हो जाता है तो पीड़ित व्यक्ति को सबसे पहले आरोपी को एक कानूनी नोटिस भेजना होता है। यह नोटिस बैंक से चेक बाउंस की जानकारी मिलने के 30 दिनों के भीतर भेजा जाना जरूरी होता है। नोटिस मिलने के बाद आरोपी के पास 15 दिन का समय होता है कि वह भुगतान कर दे। यदि वह इस अवधि में पैसा नहीं चुकाता, तो पीड़ित अगले 30 दिनों के अंदर अदालत में शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके बाद कोर्ट आरोपी को समन भेजती है और सुनवाई शुरू होती है। यदि अदालत को लगता है कि आरोपी दोषी है, तो नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत उसे सजा हो सकती है जिसमें जेल या जुर्माना या दोनों शामिल हो सकते हैं।

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चेक बाउंस से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें?

चेक बाउंस से बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि चेक देने से पहले अपने बैंक खाते की बैलेंस जरूर चेक करें। कई लोग जल्दबाजी में चेक दे देते हैं और बाद में खाते में पैसे नहीं होते, जिससे परेशानी खड़ी हो जाती है। चेक पर सही तारीख, सही राशि और सही सिग्नेचर लिखना भी जरूरी है। अगर आप पोस्ट-डेटेड चेक दे रहे हैं तो यह सुनिश्चित कर लें कि उस तारीख तक आपके खाते में पर्याप्त पैसे होंगे। इसके अलावा बैंक की SMS या मोबाइल अलर्ट सेवा चालू रखना भी फायदेमंद रहता है, जिससे खाते की स्थिति की जानकारी समय-समय पर मिलती रहती है।

चेक बाउंस में आरोपी को कब मिलती है जमानत?

पहले चेक बाउंस के मामलों में जमानत मिलना अपेक्षाकृत आसान माना जाता था, लेकिन अब अदालतें इसमें थोड़ी सख्ती बरत रही हैं। कोर्ट यह भी देखती है कि आरोपी ने पीड़ित को भुगतान करने की कोशिश की है या नहीं। यदि आरोपी आंशिक या पूरा भुगतान कर देता है तो जमानत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन अगर वह बार-बार कोर्ट की तारीख पर नहीं आता या मामले को जानबूझकर लंबा खींचने की कोशिश करता है, तो अदालत उसकी जमानत रद्द भी कर सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में जिम्मेदारी से पेश आना और समय पर कोर्ट में उपस्थित होना बहुत जरूरी होता है।

Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी को कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कानूनी मामले या चेक बाउंस से जुड़े विवाद में सही मार्गदर्शन के लिए योग्य वकील या आधिकारिक सरकारी स्रोत से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है।

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